Friday, February 2, 2018

क़ब्र में उतरते ही....मोहम्मद अलवी


क़ब्र में उतरते ही
मैं आराम से दराज़ हो गया
और सोचा
यहाँ मुझे
कोई ख़लल नहीं पहुँचाएगा
ये दो-गज़ ज़मीन
मेरी
और सिर्फ़ मेरी मिलकियत है
और मैं मज़े से
मिट्टी में घुलता मिलता रहा
वक़्त का एहसास
यहाँ आ कर ख़त्म हो गया
मैं मुतमइन था
लेकिन बहुत जल्द
ये इत्मिनान भी मुझ से छीन लिया गया
हुआ यूँ
कि अभी मैं
पूरी तरह मिट्टी भी न हुआ था
कि एक और शख़्स
मेरी क़ब्र में घुस आया
और अब
मेरी क़ब्र पर
किसी और का
कतबा नस्ब है!!

-मोहम्मद अलवी
सौजन्यः ठाले-बैठे

3 comments:

  1. वाह बहुत खूब ..मौन ही सही तारीफ होगी ....
    कलम को नमन मेरा गहराई तक उतर गई

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