Tuesday, September 14, 2021

761 ..कुछ शब्द कुछ यादें शब्दों की बचपन से आज तक की

सादर अभिवादन
आज हिन्दी दिवस है

सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ

रचनाओं पर एक नज़र..


कुछ शब्द कुछ यादें शब्दों की
बचपन से आज तक की
एक मास्टर और उसकी सौंटी से
बजते हाथ के साथ कान लाजवाब

कपड़े हमेशा आये समझ में
ढकने वाली एक ढाल झूठ को
सच समझ में आया हमेशा
कपड़े उतारी हुई
सारी शख्सियत साफ साफ

रौशनी जहाँ
पहुंची नहीं
वहां की आवाज़ हो
भाषा से
कुछ अधिक हो
तुम हिंदी


स्त्रियां निर्जला व्रत प्यार का प्रतीक मानती हैं
पति,बच्चों के लिए ...
ऐसा करके वे खुद को मान लेती हैं सावित्री
और दृढ़ माँ !
अनादि काल से ऐसा देखते देखते
पुरुषों ने,बच्चों ने मान लिया
कि उनकी पत्नी
उनकी माँ - सबसे जुदा हैं ।
गर्व से कहते हैं सब,
"बिल्कुल कुछ नहीं लगा ...!"

बाथरूम सिंगिग का भी एक घराना होना चाहिए ..कुछ अलग सा

गाने और पानी का सदियों से नाता रहा है या यूं कहिए पानी की कलकल ध्वनि ने गायन की विधा को ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। अब सागर, नदियां, सरोवर तो वैसे रहे नहीं कि उनके किनारे सुर साधे जा सकें ! ले-दे कर स्नानगृह ही ऐसी जगह बची है जहां कुछ-कुछ पानी भी है, कुछ-कुछ तन्हाई भी और कुछ-कुछ फुर्सत भी, जिसे दिल ढूँढ़ता रहता है। इसीलिए इसी कुछ-कुछ में बहुत कुछ ढूंढते इन अंजान कलाकारों को कोई तो ठीहा मिलना ही चाहिए ! तो क्या ऐसा लगता नहीं कि इन बहुआयामी कलाकारों को भी हक़ है अपनी पहचान बनाने का, अपनी कला को निखारने का, अपनी निश्छल सेवा भावना के बदले समाज से कुछ पाने का, अपना घराना बनवाने का !!  क्योंकि ये वे कलाकार हैं जो अपनी कला से प्यार करते हैं पर उस कला की मेहरबानी इन पर कभी नहीं होती। 




अनुवादकः 
पंखुरी सिन्हा
व्यर्थ कोशिश करती हूँ
पकड़ने की उसे
छूटता, बचता है वह
मौसम के जहाज़ सा
क्या पहुँच पाएगा वह
अन्ततः खुले समुद्र तक?

आज के लिए बस
सादर


2 comments:

  1. शुभकामनाएं हिंदी दिवस की| आभार |

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  2. हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। अच्छी रचनाओं का संकलन।

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