Monday, September 21, 2020

485 ..." आपका व्यवहार ही आपका परिचय है "

 सादर वन्दे..
आप कैसे हैं आज
मैं भली-चंगी हूँ
मौसम और माहोल गंदा है
इसीलिए पूछ बैठी..
आज की पसंदीदा रचनाएँ...


ख़ुशी ...ओंकार जी

मैं तुम्हें खोजता रहा बाहर,

पर तुम तो अन्दर ही थी,

कभी तुमने आवाज़ नहीं दी,

कभी मैंने अन्दर नहीं झाँका.


दर्पण भी न पढ़ पाया ..उदयवीर सिंह

मुख के रंग -रंगोली को ।
कर जोड़े मुस्कान अधर 
मानस की घात ठिठोली को ।
रेशम के वस्त्रों में लिपटा ,
काँटों का उपहार मिला ,


केतकी वन के पार - - शान्तनु सान्याल


अधूरा रहा जीवन वृत्तांत, तक़ाज़े से

कहीं छोटी थी रात, हर चीज़ को

लौटाना नहीं आसान, संग

हो के भी कुछ निःसंग

पल, निबिड़ रात्रि

विवस्त्र


तेरी यादें ..पंकज प्रियम

तेरा चेहरा तेरी आँखे, तेरी धड़कन तेरी साँसे।
सताती है मुझे हरपल, तुम्हारे संग की यादें।।

तेरा चेहरा मेरी आँखें, मेरी धड़कन तेरी साँसे।
जगाती है मुझे हरपल, तुम्हारे संग की रातें।।




आकाश कब बुलाये ..अनीता जी

भूली सी कोई याद

जाने कब से सोयी है

हर दिल की गहराई में 

करती है लाख इशारे जिंदगी

किसी तरह वह याद 

दिल की सतह पर आये 



फरहत शहज़ाद की ग़ज़लें ...अशोक खाचर

भटका भटका फिरता हूँ 
गोया सूखा पत्ता हूँ 

साथ जमाना है लेकिन
तनहा तनहा रहता हूँ  

धड़कन धड़कन ज़ख़्मी है 

फिर भी हसता रहेता हूँ 


चलते - चलते..

‘उलूक’ कुछ करना कराना है तो

गिरोह होना ही पड़ेगा


खुद ना कर सको कुछ

कोई गल नहीं

किसी गिरोहबाज को

करने कराने के लिये

कहना कहाना ही पड़ेगा


हो क्यों नहीं लेता है

कुछ दिन के लिये बेशरम

सोच कर अच्छाई 


हमाम में

सबके साथ नहाना है  

खुले आम कपड़े खोल के

सामने से तो आना ही पड़ेगा

सादर..










6 comments:

  1. खुद ना कर सको कुछ
    कोई गल नहीं
    किसी गिरोहबाज को
    करने कराने के लिये
    कहना कहाना ही पड़ेगा
    ताजा, गरमागरम
    मस्त रहिए...

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  2. उव्वाहहहहहहह
    बेहतरीन..
    आभार..

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  3. सुन्दर संकलन. मेरी कविता शामिल करने के लिए आभार.

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  4. तहे दिल से आपका शुक्रिया - - नमन सह।

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  5. अप्रतिम संकलन

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