Sunday, September 13, 2020

477..कल हिन्दी दिवस है...लिखिए और जोर-शोर से लिखिए

 सादर अभिवादन
कल 14 सितम्बर को 
हिन्दी दिवस मनाया जाएगा
लोगों ने आज से ही 
कमर कस ली होगी कल के लिए
कल आनन्द आएगा 
हिन्दी का स्वरूप नया देख कर
और परसो से फिर...
सुशान्त, रिया और कंगना
दिखाई देंगे.....देश की
सोचेंगे नही लोग
....
आज की सद्य प्रकाशित रचनाएँ

साल के पूरे ३६५ दिनों में एक दिन, 
असली हों या नकली, 
हिन्दी के मान सम्मान की 
ढेर सारी बातें कर लो, 
अच्छे-अच्छे लेख, कवितायें, 
कहानियाँ लिख कर 
अपनी कर्तव्यपरायणता और दायित्व बोध का 
भरपूर प्रदर्शन कर लो और फिर बाकी ३६४ दिन 
निश्चिन्त होकर मुँह ढक कर 
गहरी नींद में सो जाओ अगले हिन्दी दिवस के आने तक !



कभी तू ने सोचा नहीं
बताया नहीं है क्या तुम्हारे  मन में
क्या चाहते हो मुझ से |
अनगिनत  आकांक्षाएं  अपेक्षाएं
मुझे भी तुम से होगी
कोई तो अपेक्षा तुमसे
कभी जानना चाहा नहीं |


कबीर कहते हैं- 
सब धरती कागज करूँ, लिखनी सब बनराय। 
सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय।। 
अर्थातः- पूरी पृथ्वी को कागज, सभी जंगल को कलम, 
सातों समुद्रों को स्याही बनाकर लिखने पर भी 
गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते।


सुबह की नाज़ुक धूप निःशब्द
पाँव, वादियों से उतर कर
शहरी कोलाहल में खो
गई, बहुत लोग
भीड़ में यूँ
ही खो
जाते हैं,कोई उनका हिसाब नहीं
रखता, कोई उन्हें तलाश भी
नहीं करता, उत्तरोत्तर
वो अपने आप ही
सभी से ख़ारिज
हो जाते हैं,

किसी के पास कहाँ समय है
कहाँ किसे इस सब के लिये सोचना है
रोने के लिये रखा है सामने से कोरोना है

‘उलूक’
तेरी बुद्धि तेरा सोचना तेरा नजरिया
बदलना तो नहीं है
तेरे लिये कूड़े पर तेरा लिखना
हमेशा
कूड़ा कूड़ा जैसा ही तो होना है।
...
आज कुछ सही सा लग रहा है
आज से पहले कुछ गड़बड़ सा था
सादर..

6 comments:

  1. हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर शुभकामनाएं। आभार।

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  2. आपका आभार,नमन सह। हिंदी दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं।

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  3. अग्रिम शुभकामनाएं
    सादर..

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  4. सार्थक सूत्र सुन्दर संकलन ! मेरे आलेख को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार यशोदा जी ! सप्रेम वन्दे !

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  5. सुंदर रचना प्रस्तुति

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  6. सुन्दर रचना संकलन |मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद |

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