Friday, October 23, 2020

517 ..सच में हम कितने मासूम होते हैं !

बाद नमस्कार के
समाचार है कि नवरात्र रवानगी पर है
परसों रावण मरेगा..य़दि सच में मर गया तो 
राम तो वो राम नहीं न है जो मार सके 
आधुनिक रावण को..एल्लो करने लगे बकवास
हम भी...

चलिए पिटारा खोला जाए....
पहली खबर नैनीताल समाचार से...


चुल्लूभर पानी में डूब मरने की और भी कई वजहें हैं। मगर हम दिन भर में न जाने कितने चुल्लू अल्कोहल हाथों में पोत रहे हैं। जिसके पास से गुजरिए वही ठर्रा पिए जान पड़ता है। जिनको अल्कोहल का नाम सुनकर भी पाप लग जाता है, ऐसे लोग भी इन दिनों अच्छी-खासी मात्रा में इसे अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नस-नाड़ियों में पहुंचा रहे हैं।


निकट है जो सदा अपना 
खोजते हम दूर नभ में,
चाहतों से दिल भरा यह 
एक उसकी भी दिखाते !



निकली ही क्यूँ ...
नंगे पाँव गोरी ।
दिखी नहीं ता पै...
धूप निगोड़ी ॥ 


नवरात्रि में, दिपावली में या ऐसे ही अन्य त्यौहारों पर अखंड दिया जलाया जाता है। अखंड दिया जलाते वक्त हर समय चौकन्ना रहना पड़ता है कि कहीं दिये का तेल खत्म न हो जाए! इस समस्या का समाधान लेकर आएं है, नेशनल मेरिट एवार्ड से सम्मानित कुम्हार पारा (कोंडागांव) निवासी श्री अशोक चक्रधारी जी। उनके द्वारा बनाया गया यह दिया लगातार बारह से चौबीस घंटे जल सकता है और उस में बार-बार तेल डालने की भी झंझट नहीं! है न बिल्कुल जादुई तरीका?




चापलूसों की है सरकार 
देखो...
ज़रा आहिस्ता बोलो 

जज़्बातों को
को थोड़ा 
नापो -तोलो  
अपनी आवाज़ में 
मधुर ज़हर घोलो 



वह 
ऊष्मा है
ऊर्जा है
उमंग है
उत्साह है

वह 
लय है
लोरी है
तरंग है
त्वरित है



गिरते पत्तों के शब्द सुन पाओगे
बहुत क़रीब, जब चेहरे में
उभर आएंगे, लकीरों
के रेगिस्तान,
आरशी का
नगर
अचानक लगेगा जनशून्य, पारद
...
बस इतना ही
सादर




6 comments:

  1. मेरी कविता को मुखरित मौन में स्थान देने हेतु हार्दिक आभार
    सादर🙏

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  2. व्वाहहहह..
    बेहतरीन...
    सादर..

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  3. मेरी रचना को सांध्य दैनिक मुखरित मौन में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, दिग्विजय भाई।

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  4. मुग्ध करता अंक - - सभी कृतियां अपने आप अनूठी है - - मुझे शामिल करने हेतु, हार्दिक आभार - - नमन सह ।

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  5. उम्दा लिंक्स चयन
    –साधुवाद

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