Sunday, October 4, 2020

498 ..''मसक समान रूप कपि धरी, लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी !''

सादर नमस्कार
अक्टूबर यानि छुट्टियों का महीना 
कुल मिलाकर इक्तीस दिनों में
पंद्रह दिन का अवकाश होगा
सही माने तो ये 2020 का वर्ष
अवकाश ही का रहा अब तक
बस ज्यादा बतकही नहीं

रचनाएँ भी पढ़नी है...



वृक्ष की शीतल छाँव में बैठ 
फ़ुरसत से गढ़ा है विधाता ने
नेह का है पवित्र बँधन हमारा
हम मिलेंगे जीवन डगर पर
क़दम ख़ुद व ख़ुद तय करेंगे सफ़र
हर्षाते विश्वास का कहता है सवेरा।

फ्लाईओवर शहरों के लोगों की लाइफ लाइन
.... संजय भास्कर



फ्लाईओवर पर कविता लिखना
आसान नही है
फ्लाईओवर पर कविता लिखने से पहले
शहर के लोगो के विचार जान लेना
जरूरी है
जो हर रोज या अक्सर फ्लाईओवर
के ऊपर से गुजरते है
क्योंकि वही लोग बता सकते है

अस्तित्त्व और हम ..अनीता जी 


एक हवा का झोंका भी आकर 
उसकी खबर दे जाता है
दूर गगन में उगता हुआ साँझ का तारा
उसकी याद से भर जाता है
बादलों में बना कोई आकार
छेड़ जाता है मन की झील को
डाली पर एक फूल का खिलना




तब किसी को गले लगाना
कोई डर की बात नहीं थी,
हम फिर भी बचते रहते थे,
इन मौक़ों के खो जाने का.

.....कुछ अलग सा


वैसे इनकी नई पीढ़ी को पहले की बनिस्पत रक्त की आपूर्ति
बहुतायद में और वह भी कम खतरे के साथ होने लगी है। जिसका
सारा श्रेय हमारी रहम दिल, परोपकारी, सूक्ष्म वस्त्र धारी ललनाओं
को जाता है, जिन्होंने बारहों महीने अपने वस्त्रों में कटौती कर इन
मासूम जीवों की जरूरत को पूरा करने का संकल्प ले रखा है। 
..
आज बस
कल की कल
सादर

4 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति. मेरी कविता शामिल करने के लिए आभार.

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  2. अवकाश का मजा तो उन्हें तब आता जब बच्चों का स्कूल खुला होता, फिर भी त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है, शुभकामनायें ! पठनीय रचनाओं का संयोजन, आभार !

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  3. सुंदर संकलन मेरी रचना को स्थान देने हेतु आभार

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  4. रचना को मान देने हेतु हार्दिक आभार, स्नेह बना रहे

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