Sunday, July 12, 2020

413 ..होती है अधिक पीड़ादायी अमरता

एक समस्या का अंत हुआ
और अंत के साथ-साथ
प्रारम्भ हो गई एक
नई समस्या..
सादर अभिवादन....
आज की रचनाओं पर एक नज़र...

प्रेरणादायक उद्धरणों 
उपदेशों के सार में
जहाँ भी शांति 
का उल्लेख था
लगा दिया गया
'बुकमार्क'
ताकि शांति की महत्ता की
अमृत सूक्तियाँ
आत्मसात कर सके पीढ़ियाँ।


यूँ तुमको पुकारे,
शायद तुम मिलो, नभ के किसी छोर पर,
कहीं, सितारों के कोर पर,
मिलो, उस पल में, किसी मोड़ पर,
एकाकी पल हमारे,
संग तुम्हारे,
व्यतीत हो जाएंगे, सारे!


Road, Forest, Season, Autumn, Fall
मंज़िल न मिले तो न सही,
आगे बढ़ते रहना 
और चलते रहना ही होगी 
मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि.


मैं कब से प्रश्न बन कर भटकता हूं
मुझे कोई यक्ष नहीं मिलता
जो मुझे थाम ले,सहेज ले

पूछने के वास्ते
किसी युधिष्ठिर से
मैं यूं ही निरर्थक सा भटकता हूं


मौन मयंक
हर्षित उडुगण
धरा विमुग्ध


गिरि चोटी से
बहे पिघल कर
फेनिल दुग्ध
....
इति शुभम्
सादर

4 comments:

  1. बढ़िया रचनाएँ..
    आभार..
    सादर..

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  2. हार्दिक धन्यवाद दिग्विजय जी ! बहुत बहुत आभार आपका ! सभी सूत्र अनुपम ! सादर वन्दे !

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  3. अच्छा संकलन रचनाओं का

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  4. बहुत सुन्दर संयोजन. मेरी कविता शामिल की. शुक्रिया.

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