सादर अभिवादन।
मुखरित मौन के नवीनतम अंक के साथ आपका स्वागत है। पेश हैं आपकी सेवा में हाल ही
में प्रकाशित चंद चुनिंदा रचनाएँ -
में प्रकाशित चंद चुनिंदा रचनाएँ -
होती माँ जो आज चाट कर लाड जताती .
होता तनिक भी दूर जोर से बड़ा रंभाती ;
स्नेह से पिलाती दूध जरा भूखा जो दिखता .
ममता से रखती खूब माँ बनकर इतराती ;
पृथ्वी की विषमता
मन की पीड़ा
तोड़ कूल किनारे
बन्द दृगों से
बन के अश्रु बूँद
बह निकली

छोड़कर अपनी जरूरतें अधूरी
सब छलनी होकर बिखर जाता
जब बच्चों से मिलता धोखा
प्यार में यह कैसी मजबूरी
माँ-बाप से बढ़ जाती दूरी
बारिश के मौसम में उफनती नदी को देखना ऐसा लगता है
मानो किसी ईश्वरीय शक्ति का साक्षात्कार हो रहा हो ।
रेनकोट पहनकर मैं तुरंत तैयार हो गई ।
तेज बारिश हो रही थी। दस मिनट में हम
पुल पर थे जिसके नीचे से उल्हास नदी अपने
पूरे सौंदर्य और ऊर्जा के साथ
प्रवाहमान हो रही थी ।
मानो किसी ईश्वरीय शक्ति का साक्षात्कार हो रहा हो ।
रेनकोट पहनकर मैं तुरंत तैयार हो गई ।
तेज बारिश हो रही थी। दस मिनट में हम
पुल पर थे जिसके नीचे से उल्हास नदी अपने
पूरे सौंदर्य और ऊर्जा के साथ
प्रवाहमान हो रही थी ।

चंदेला राजवंश में जैन धर्म के अनुयायी बड़ी संख्या में थे. यहाँ जैन मंदिर भी बनाए गए थे. इन मंदिरों में उस समय के अभिलेख भी पाए गए हैं. 1858 में जैन मंदिरों के इर्द गिर्द एक परिसर बनाया गया और रखरखाव का काम भी शुरू हुआ. यहाँ एक म्यूजियम भी है जिसमें ऐतिहासिक अवशेष रखे हुए हैं. इन जैन मंदिरों में आजकल धर्म शिक्षा और पूजा अर्चना की जाती है. खजुराहो के अन्य हिन्दू मंदिरों में ऐसा नहीं है. अन्य मंदिरों की तरह यहाँ कामुक मूर्तियाँ नहीं हैं.
अब आज्ञा दें
मिलेंगे फिर अगले अंक में।
रवीन्द्र सिंह यादव