किस डे
इस दिन सच्चे प्रेमी-प्रेमिका
किस के जरिए अपना प्यार जताते हैं।
चलिए दो दिन और वेलेनटाईन की बातें कर लें
फिर अपनी वही दिन और वही रात
सादर अभिवादन
रचनाएँ कुछ यूँ है
किस के जरिए अपना प्यार जताते हैं।
चलिए दो दिन और वेलेनटाईन की बातें कर लें
फिर अपनी वही दिन और वही रात
सादर अभिवादन
रचनाएँ कुछ यूँ है
प्रतिकार लिख मेरी कलम !
मत लिख अब बंसी की धुन,
मत लिख भौंरों की गुनगुन,
अब झूठा विश्वास ना बुन,
लिख, फूलों से काँटे चुन !
बहुत हुआ, अब कटु सत्य
स्वीकार, लिख मेरी कलम !
बस केवल
खादी का ही
ताना बाना
रहने दो ना ..
वादों को
सनम ...
लक्ष्य को जो विलग हुई हूँ घने तरूवर से,
भटकती जो अटक गयी कांटो की झाड़ी में,
गति के झोंकों से बढ़ूँ,वीरान पाती हूँ,
माटी में जाकर मिलूँ,मैं माटी का कण हूँ।
व्याकुल पथिक .....प्रीति का ये कैसा रंग ..!

"जान ! ये मेरा आखिरी वैलेंटाइन डे है।"
मोबाइल पर बात करते हुये सोनाक्षी कुछ इसतरह रुआँसी हो गयी थी कि सुमित तड़प उठा था।
उसने खुद को संभालते हुये कहा- " यूँ उदास न हो ,मेरे मनमंदिर में तुम सदैव रहोगी।"
क्षितिज में रेणु
जीवन की ढलती साँझ में
गीत मेरे सुनने आना
मन के तटपर यादों की
सीपियाँ चुनने आना
लिख जिन्हें पास अपने
छिपा रख लेती हूँ मैं
एकांत में कभी इन्हें
पढ़ रो कभी हँस देती हूँ मैं
ख़त तुम्हारे नाम के
चुपके से कभी पढने आना
व्याकुल पथिक .....प्रीति का ये कैसा रंग ..!

"जान ! ये मेरा आखिरी वैलेंटाइन डे है।"
मोबाइल पर बात करते हुये सोनाक्षी कुछ इसतरह रुआँसी हो गयी थी कि सुमित तड़प उठा था।
उसने खुद को संभालते हुये कहा- " यूँ उदास न हो ,मेरे मनमंदिर में तुम सदैव रहोगी।"
क्षितिज में रेणु
जीवन की ढलती साँझ में
गीत मेरे सुनने आना
मन के तटपर यादों की
सीपियाँ चुनने आना
लिख जिन्हें पास अपने
छिपा रख लेती हूँ मैं
एकांत में कभी इन्हें
पढ़ रो कभी हँस देती हूँ मैं
ख़त तुम्हारे नाम के
चुपके से कभी पढने आना



