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Friday, July 26, 2019

64 -- "करगिल विजय दिवस"

जब पींगें बढ़ी मित्रता की 
था फरवरी महीना,
पाकिस्तानी सेना को रास न आया 
दो मुल्कों का अमन से जीना। 

चलिए पढ़ते हैं करगिल दिवस की विशेष प्रस्तुति की ओर 
 कुछ रचनाएँ जो विशेषतः आज के दिन के लिए
शब्दबद्ध की गयी हैंं

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कैसी होंगी?

 

कारगिल दिवस(26 जुलाई) 
वीर सपूतों के नाम घर से दूर वतन के लिए प्राण न्योछावर
 करने को हर पल तैयार एक सैनिक मन ही मन अपने परिवार के लिए
 कैसा महसूस करता होगा इसे शब्द देने का मेरा छोटा सा प्रयास-
 कोई भी राष्ट्र कितना भी शांति प्रिय क्यों ना हो ,
 अपनी सीमाओं की हर तरह से सुरक्षा करना उसका परम कर्तव्य है| 
यदि कोई देश अपनी सुरक्षा में जरा सी भी लापरवाही करता है 
उसे पराधीन होते देर नहीं लगती |क्योंकि राष्ट्र की सीमाओं के पार बसे दूसरे राष्ट्र भी शांति प्रिय हों , ऐसा सदैव नहीं होता 
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फिर आओ आजाद

 

भारत को आजाद कराने आज के दिन जन्मे आजाद 
माता इनकी देवी जगरानी पिता थे 
पंडित सीताराम मध्य प्रदेश में जन्म लिया रहने वाले थे 
भाबरा गाँव बचपन से ही दृढ़ निश्चयी स्वाभिमानी बालक थे 
आजाद देशभक्ति से ओतप्रोत थे
 दिल में क्रांति की ज्वाला थी अंग्रेजों के गले की फांस बन गए 
आजादी उनका जुनून बन गई आजाद 
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कारगिल की यहीं कहानी

सिंधु की धारा में धुलता 'गरकौन' के गांव में।
 था पलता एक नया 'याक' उस चरवाहे की ठाँव में। 
पलता ख्वाबों में अहर्निश, उस चौपाये का ख्याल था।
 सर्व समर्पित करने वाला, वह 'ताशी नामोग्याल' था।
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जब पींगें बढ़ी मित्रता की 
था फरवरी महीना,
पाकिस्तानी सेना को रास न आया 
दो मुल्कों का अमन से जीना। 

उधर धीरे-धीरे रच डाला  
साज़िश मक्कारी का खेल, 
साबित किया पाकिस्तान ने 
मुमकिन नहीं केर-बेर का मेल।
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सादर