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Wednesday, July 24, 2019

62....मेरी नींद, मेरा चैन दरकने लगता है

दीदी का आदेश सिरोधार्य
आज हम हैं...
इकसठवाँ अंक लेकर...
पढ़िए आज की मिली-जुली रचनाएँ....


जब भक्त भगवान से
मिलते हैं तो होता है इश्क़
जब राधा कृष्ण मिलते हैं
तो होता है इश्क़

★★★★★★


तारे हैं वहीं, ख्वाब सारे हैं वहीं, 
ये सपन, हमारे हैं वहीं,
बहकी है ये कश्ती, अब सहारे हैं वहीं,
दुग्ध चाँदनी सी है रात,
ले, हाथों में हाथ,
संग मेरे, चाँद के पार चलो...

★★★★★★


सावन में हरियाली कैसे, वसुधा बूँद तरसती है,
सूखे खेतों को देख-देख, आँखे कृषक बरसती है।
हरी चूड़ियाँ कैसे खनके, रूठा बैठा साजन है,
मोर-पपीहा कैसे नाचे, सूखा-सूखा सावन है।

★★★★★★★


चाँद से हम भारतीयों की मुहब्बत की दास्ताँ बहुत पुरानी है 
जो इतनी आसानी से जाने वाली नहीं! प्राचीन कवियों से लेकर 
वर्तमान के ग़ज़लकारों, गीतकारों, चित्रकारों तक चाँद के 
बिना किसी की बात न बनी! चाँद है तो ख़ूबसूरती है, 
करवाचौथ का इश्क़ है, ईद का जश्न है. चाँद की 
इतनी बातें हैं कि लगने लगा है - 
"आधा है चंद्रमा रात आधी, 
रह न जाए तेरी-मेरी बात आधी". 

लेकिन एक-दो ऐसी भी चिड़िया है 
जो जँगले पे 
मेरे दिल के 
घर बनाकर रहने लगी है 

उन्हें उड़ाना भी नही बनता मुझसे
ना ही दाना खिलाना 

अब और नहीं
दीदी ने पाँच लिंक ही कहा है
श्वेता