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Saturday, July 20, 2019

58....लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से

सादर अभिवादन...
आज हम नहीं वे आने वाले थे
आग्रह भूल गए...
किसी कारण से वे शहर से बाहर कर दिए गए

आज हमारी पसंद की सद्य प्रकाशित रचनाएँ...

गोपाल दास नीरज का कारवां
आदमी को आदमी बनाने के लिए
ज़िंदगी में प्यार की कहानी चाहिए
और कहने के लिए कहानी प्यार की
स्याही नहीं, आँखों वाला पानी चाहिए


सुबह तक महती रही,मुझमेँ रात की रानी की तरह,
मुझपे गुज़रना था जिसे जवानी की तरह..

बहुत खुश थे जिससे पीछा छुड़ा के अमीर,
याद रहा वो शख्श दादी की कहानी की तरह,


न हृदय को पड़ी,  मैं की  मार, 
न अंहकार से  हुई  तक़रार,
मिली चंद साँसें  उसी  को  जीवन वार,
ज़िंदगी अल्फ़ाज़  में  सिमटी  किताब  बन  गयी |


तुम दुखों के सागर में
या फिर क्षणिक आनंद में उलझे हो
वहाँ सर्वत्र सुख ही सुख है
उस भव्यता से
तुम अचंभित रह जाओगे,


My photo
तेरी याद में डूबा हूँ पर
ग़म के प्याले नही भरूँगा
सुन लूँगा इस जग के ताने
नाम तेरा मैं कभी ना लूँगा

बढ़ जाऊंगा तन्हा ही अब
राह तुम्हारी नहीं तकूँगा
यादों की जलती चिंगारी
सिरहाने अब नही रखूँगा
-*-*-*-*-
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे
स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे

शत् शत् नमन कवि नीरज जी को
आदेश दें...
यशोदा