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Monday, June 1, 2020

372...तू ही भगवान है बाकी कहानियों के किरदार हैं

सादर नमस्कार
अनलॉक -1 का
पहला दिन
लॉक ओपन हो गया
फिर देखिए
सारे अपने खाल से बाहर
निकल आए
राम ही मालिक है
.....
रचनाएँ देखिए.....
साजन-सजनी,
सगाई,
शहनाई,
बाराती-बारात।

सात फेरे,
सात वचन,
सिन्दूर,
सुहाग-सुहागन,
सुहाग रात।


सुबह खिड़की से झाँककर देखा तो जूही मुस्कुरा रही थी. 
नन्हा सा पौधा अब बड़ी सी बेल बनकर इतराने लगा है. 
हवा चलती है तो फूल खूब झूमते हैं. नन्हे मियां 
हरसिंगार भी घुटनों चलते हुए अब पाँव-पाँव चलने लगे हैं. 
हरे पत्ते खूब आ गए हैं.



पिया अब तो नशा तुम छोड़ दो,
तोरे पैयां पड़ूँ बालमा।
तोरे पैयां पड़ूँ तोरे विनती करूँ,
पिया अब तो नशा तुम छोड़ दो,
तोरे पैयां पड़ूँ बालमा।


गिर जाये हर मूढ़ मान्यता 
हो भीतर का हर कोना जगमग
जो जगीं अचानक उद्धघाटन से 
किसी सत्य के 
उन मुस्कानों का हार बना लें !


बहुत से हैं
पूरे हैं

दिख रहे हैं
साफ साफ
कि हैं

फिर
किसलिये
ढूँढ रहा है
जो
अधूरे हैं
.....
आज बस
कल आते हैं
नया कुछ लेकर
सादर