Showing posts with label 331. Show all posts
Showing posts with label 331. Show all posts

Monday, April 20, 2020

331...यह तो बस मैं हूँ के इस हाल में भी जिंदा हूँ

सादर अभिवादन
आज सोमवार से कतिपय
वस्तुओं की दुकाने को खोलने की 
अनुमति दी गई है
अखबारों ने कहा है कि
छः राज्यों को 14 शहरों में ही
देश के 68 प्रतिशत मरीज हैं
राम करे वे भी शीघ्र स्वस्थ हों
....
गोस्वामी तुलसीदास ने भी
रामचरितमानस के उत्तर काण्ड में 
कोरोना का जिक्र किया है
इस प्रकरण के अंत में लिखेंगे
....
फिलहाल रचनाएं देखें....

एक पत्ती मिली
उसके हरे में थोड़ा कत्थई घुलने लगा था
डाल मजबूती से पकड़ी हुई थी उसने
वो पत्ती मेरी उम्र की होगी शायद


samay%2Bbada%2Bbalwan
कभी के दिन तो कभी रात बड़ी होती है
विपत्ति मनुष्य के साहस को परखती है
काम बिगड़ते देर नहीं बनते देर लगती है
मृत्यु सब गलतियों पर नकाब डाल देती है
बहुत बड़ी दावत भी थोड़ी देर की होती है
मौत तारीख देखकर नहीं आती है


सब कुछ याद रखिये और तब तक याद रखिये जब तक अब सब कुछ आर पार न हो जाए। नहीं तो हमारी आने वाली नस्लें उनके सामने भविष्य में आ रही नई मुश्किलों के अतिरिक्त विरासत में मिली इन मुश्किलों को भी निर्णायक रूप से ख़त्म न कर पाने के लिए हमें कटघरे में जरूर खड़ा करेंगी।



टूटा होगा तृण-तृण में वो
जैसे मेरा दिल है टूटा....
रोया होगा उस पल वो भी
जान तिरा वो प्रेम था झूटा
दिल पे पड़ी गाँठों को ऐसे
कब किसने सुलझाया होगा...
फूल गुलाब तुम्हें भेजा जो
जाने कहाँ मुरझाया होगा....
....
अब ऊपर लिखे अधूरे प्रकरण पर
गोस्वामी तुलसीदास जी इस महामारी के मूल स्रोत 
चमगादड के विषय में उत्तरकाण्ड दोहा 120 (14)  में 
वर्षो पहले की बता गये थे जिससे सभी लोग आज दुखी है : 
"सब कै निंदा जे जड़ करहीं। 
ते चमगादुर होइ अवतरहीं॥
सुनहु तात अब मानस रोगा। 
जिन्ह ते दु:ख पावहिं सब लोगा॥14॥"

आप रामचरितमानस का अवलोकन करे
सत्यता को परखें ..आगे की चौपाइयों में
निदान भी लिक्खा है

अब एक ग़जल सुनिए
रंज और दर्द कि बस्ती का मैं बाशिंदा हूँ
यह तो बस मैं हूँ के इस हाल में भी जिंदा हूँ
ख्वाब क्यों देखूं वोह कल जिसपे मैं शर्मिंदा हूँ
मैं जो शर्मिंदा हुआ तुम भी तो शर्माओगी


अब बस
सादर