सादर अभिवादन
03 मार्च 1716 में
03 मार्च 1716 में
राजा राव नंदलाल मंडलोई ने
इंदौर शहर की स्थापना की थी.
आज 03 मार्च है
आज 03 मार्च है
और आज ही के दिन अवतरित हुई है
हमारी प्रिय सखी श्वेता सिन्हा

उम्र के पेड़ से
निःशब्द
टूटती पत्तियों की
सरहराहट,
शिथिल पलों में
सुनाई पड़ती है,
मौन एकांत में
पढ़िए विस्तार से ....
हमारी प्रिय सखी श्वेता सिन्हा
ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ

उम्र के पेड़ से
निःशब्द
टूटती पत्तियों की
सरहराहट,
शिथिल पलों में
सुनाई पड़ती है,
मौन एकांत में
पढ़िए विस्तार से ....
आपकी सहेली अपने छः वर्ष पूरे कर रही है

अपने 'विश्वास' की कसौटी पर 'आपकी सहेली' खरी उतरी। आपने पाठको की मांग और आवश्यकताओं के अनुरुप ब्लॉग में विविध विषयों को सम्मिलित किया। जिसे पाठकों ने खूब सराहा।

बँधे गट्ठर से जीवन के
एक-एक कर फिसलती
उम्र की लुआठी
बची लकड़ियाँ
कौन जाने किस पल
काल की घाटी में
राख बन उड़ जायेंगी!!!

तरणि तट मिट्टी के घरौंदे,
सजन बस तेरा सहारा है,
निर्मल नीर चाँद की छाया,
ऐसा सुख स्वप्न हमारा है।

तुम्हें ढूँढू कहां, आवाज़ दूं, कैसे पुकारूँ मैं
हमारे साथ को अब 'सिर्फ सपना' कर गए हो तुम
तुम्हारी 'जानजी' हूँ मैं पुकारो फिर ज़रा मुझको
यूँ चुप होकर मुझे बेनाम सहसा कर गए हो तुम

संसार में हरेक प्राणी बंधा होता है
किसी न किसी खूंटे से
परोक्ष या अपरोक्ष रूप से
स्वच्छंद जीने की कामना करना
मेरी नजर में एक भ्रम मात्र है

न दीन का ही पता और पता न ईमां का ।
बताऊं क्या तुझे क़ातिल अवाम किसका है ।।
मेरी क़िताब में गुल मिल रहे हैं कुछ दिन से ।
पता करो ये मुहब्बत का काम किसका है ।।
मैं मुन्तज़िर हूँ, मयस्सर कहाँ मुलाकातें ।
तुम्हारे ख़त में ये लिक्खा पयाम किसका है ।।
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आज बस इतना ही
कल फिर
सादर...
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आज बस इतना ही
कल फिर
सादर...
