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Saturday, February 1, 2020

253..सद‍ियों पुरानी चरक संह‍िता में भी वायरस का उल्लेख व न‍िदान द‍िए गए हैं

सादर अभिवादन
फरवरी का पहला दिन
सच मे खुशगवार है
कुछेक चिन्ताओ को छोड़कर
कोई चिन्ता नहीं

चलिए देखते हैं सारा विश्व चिन्तित क्यों है

कोरोना संक्रमण के सबसे संभावित जीव चमगादड़ और सांप बताए जा रहे हैं, इन्हें खाने से बचने को चीनी सरकार ने एडवाइजरी जारी की है परंतु सोशल  मीडिया प्लेटफार्म ट्विवटर पर ही कोरोना से रिलेटेड जो वीड‍ियो तैर रहे हैं , उनमें जीवित (हाफ-बॉयल्ड ) चमगादड़, चूहे, टैडपोल, मेढक, कुत्ते खाने की मेज पर सजे द‍िखाई दे रहे हैं, उन्हें चाव से खाते लोग और इनके अंगों को प्लेटों में रखकर डिनर टेबल डेकोरेट करते दिखाई दे रहे हैं।
https://youtu.be/JHo5BGGN3gA
 ये सब क्या है।


अन्य नियमित रचनाएँ

बारात वसंत की ..सुजाता प्रिय
मौसम की पालकी पर सज सँवरकर ।
आया है वसंत देखो जी दुल्हा बनकर।

नव पल्लवों ने वंदनवार सजाए।
मंजरियों ने स्वागत द्वार सजाए।

कोयल गा रही स्वागत गान।
भौंरों  ने  मीठे  छोड़े  तान।


तारीख़ पे तारीख़ ...पंकज प्रियम
कौन बचा रहा दरिंदो को?
फिर क्यूँ टली दरिंदो की फाँसी?
अपनी बेटी को इंसाफ़ दिलाने को
लड़ रही एक माँ को चुनौती दे गया वकील
अनन्तकाल तक नहीं होने देंगे फाँसी!


बसंत के दरख्त ...पुरुषोत्तम सिन्हा

कई रंग, अंग-अंग, उभरने लगे,
चेहरे, जरा सा, बदलने लगे,
शामिल हुई, अंतरंग सारी लिखावटें,
पड़ने लगी, तंग सी सिलवटें,
उभर सा गया हूँ!
या, और थोड़ा, निखर सा गया हूँ?
कभी था, अव्यक्त जैसे!

एक रोटी चार टुकड़े ...आँचल पाण्डेय

एक रोटी चार टुकड़े बाँटकर खाते रहे,
हम तो अपना पेट यूँ ही काटकर जीते रहे।

ए गुले गुलज़ार तेरी थाल में बोटी सजी,
मांस अपना दे के तेरा पेट पालते रहे।

आज अब बस
कल फिर मिलते हैं
सादर