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Wednesday, November 27, 2019

188..अब की बार खो दी सरकार


सादर अभिवादन

कल हम आने वाले थे पर
शायद कल का दिन ने हमको
काम ने व्यस्त कर दिया
पर आज हम हैं..
ज्वलंत घटनाओं को लेकर..

चाहत में कुर्सी की देखो नीति नियम सब ध्वस्त हुए ।
संस्कार सद्भाव समर्पण मानो रवि सम अस्त हुए॥

नवाचार दिखता है यहां अब केवल भ्रष्टाचारी का।
चहुंओर डंका है बजता गद्दारी मक्कारी का॥

सरे बाजारों में अब नेताओं की मंडी लगती है।
राजनीति की शक्ल मुझे अब क्रूर घमंडी लगती है।


अच्छा हुआ कि महाराष्ट्र के राजनीतिक ड्रामे के पहले अंक का पटाक्षेप समय से हो गया. देश की राजनीति को यह प्रकरण कई तरह के सबक देकर गया है. बीजेपी को सरकार बनाने के पहले अच्छी तरह ठोक-बजाकर देखना चाहिए था कि उसके पास बहुमत है या नहीं. इस प्रकरण से उसकी साख को धक्का जरूर लगा है. सवाल यह भी है कि क्या यह बीजेपी के साथ धोखा था? बहरहाल यह इस प्रकरण का अंत नहीं है.



महाराष्ट्र में अब शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बनेगी। यह एक अजूबे की तरह से भी देखा जा रहा है औऱ अचानक भारतीय संसदीय राजनीति में विचारधारा के अस्तित्व और प्रासंगिकता पर एक बहस छिड़ गयी है। लोग कह रहे हैं यह केर बेर के संग जैसी दोस्ती होगी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस में तो कोई वैचारिक भिन्नता और अंतर्विरोध नही है, लेकिन शिवसेना से इन दोनों कांग्रेस पार्टियों का विरोध है। 


व्यंजना है बेअसर, 
कविता से कागज भर गया
नष्ट हो गए पेड़ सारे, 
एक जंगल मर गया.

पीछे पड़े जो कुछ लफंगे, 
बुद्धि ओ उस्ताद के,
द्रोही कलम घोषित हुई, 
विचार निहत्था झर गया.

आज के लिए इतना काफी है
अभी तो शुरुआत है
अंत की प्रतीक्षा करें..
सादर