Showing posts with label 171. Show all posts
Showing posts with label 171. Show all posts

Sunday, November 10, 2019

171 ..मुखौटे बदल के देखते हैं

हो गया फैसला
कोई खुश तो
कोई नाखुश
जानबूझ कर किसी
बाजिब बात को लम्बा खींचे
तो कोफ़्त होती है
जो हुआ सो अच्छा हुआ
और आगे जो होगा वो
और अच्छा होगा
सही सोच श्रीमद्भभागवत गीता की
चलिए रचनाओँ की ओर..

धवल चाँद का पाश 
पायलों से घायल
ख़ुरदरे पाँवों में 
 पहना देते हो तुम
मल देते हो मेरी
गीली पलकों पर
मुट्ठी भर चाँदनी....

कह सकी न धडकने
हाथ की, कुछ हाथ से
हाथ में ले एक दिल 
एक दिल रखा हाथ में

हाथ ने बात कुछ यूं 
दिल की कही हाथ से
और समझे लोग ये
मिला है हाथ हाथ से

ज़नाब कुछ तो शरारत नज़र ये करती है ।
यूँ बेसबब ही नहीं वो मचल के देखते हैं ।।

गुलों का रंग इन्हें किस तरह मयस्सर हो ।
ये बागवान तो कलियां मसल के देखते हैं ।।

ज़मीर बेच के जिंदा मिले हैं लोग बहुत ।
तुम्हारे शह्र में जब भी टहल के देखते है ।।

वर्तमान का हाल ये ,फैशन बना शराब।
मातु पिता सँग पी रहे,देते तर्क खराब ।।

दिन भर मजदूरी करें ,पीते शाम शराब ।
पत्नी को फिर पीटते,करते जिगर खराब ।।


मनुष्यों का एक झुंड
भेडों को चरा रहा था
भेड़ें मूक-बघिर
सिर्फ़ सांस ले रहीं थीं
नासिका-छिद्र से
कुछ ने कहा- "चलो उस ओर"
कुछ ने कहा- "रुक जाओ यहाँ"
...
आज यहीं तक
कल फिर मिलते हैं
सादर