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Saturday, November 9, 2019

170 ..9-11 जी हाँ ऐतिहासिक दिन आज ही का दिन

9-11
जी हाँ
ऐतिहासिक दिन आज ही का दिन
9 तारीख 11वां महीना, ये महज तारीख नहीं है बल्कि एक ऐसा दिन है जिसमें हुई घटनाएँ इतिहास का रूप ले चुकी है, पाँच सदियों से चला आ रहा है अयोध्याभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुना देगा..और तो और ....आज ही भारत के नागरिकों के लिए करतारपुर साहिब कॉरिडोर का उद्घाटन भी किया जाएगा, आजादी के बाद पहली बार होने जा रहा है जब बिना किसी रोक-टोक के 
भारतीय करतारपुर सहिब गुरुद्वारे के दर्शन कर सकेंगे
और आज ही के दिन
बर्लिन की दीवार 9 नवंबर 1989 को गिरा दी गई थी और यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया था। इस आंदोलन ने शीत युद्ध के खत्म होने और उसके साथ कम्युनिस्ट शासन के समाप्त होने का संकेत दिया था। बर्लिन के गेस्ट आर्टिस्ट मैक्स गूथर ने कहा कि इस विषय पर काम करना उनके लिए सम्मानजनक बात रही है।
30th Anniversary of the Fall of the Berlin Wall
गूगल आज डूडल के जरिए बर्लिन की दीवार गिरने की 
30वीं ऐनिवर्सरी को मना रहा है। 

अब चलिए रचनाओँ की ओर..

भावों के मोती चुन चुन कर,सृजन नया अब करते हैं,
नेह निमंत्रण मिला आपका,चलो एक गीत लिखते हैं

दरवाजे पर टिकी निगाहें, वो वृद्धाश्रम में रहते हैं,
भीगे नयनों को स्याही बना ,चलो एक गीत लिखते हैं

ना मंजिल ना आशियाना पाया
वो  यायावर सा  भटक गया

तिनका-तिनका जोडा कितना
नशेमन इख़लास का उजड़ गया

रूह प्यासी कहाँ से आती है
ये उदासी कहाँ से आती है

दिल है शब दो का तो ऐ उम्मीद
तू निदासी कहाँ से आती है

बहुत गर्माहट देती हैं
शीत ऋतु में तुम्हारी चुप्पियां
जैसे किसी नवजात को माँ ने
अपनी छाती में भींच रखा हो.
एक अरसे के बाद तुम्हारा आना
ऐसे भरता है
हमारी सर्द रातों में गर्मी
जैसे किसी दुधमुँहे के तलवों पर
अभी-अभी की गई हो
गुनगुने सरसों के तेल की मालिश.


My photo
मैं यह कविता तुम्हें सौंपता हूं
चूंकि मेरे पास देने को और कुछ नहीं
इसे एक गर्म कोट की तरह रखना
जब ठंड तुम्हें जकड़ने आए
या एक जोड़ी मोटे जुराबों की तरह
जिनके पार नहीं जा सकती है ठंड,
...
ऊपर भी भारी
और नीचे उससे भी भारी
प्रतीक्षा कीजिए..
कल क्या होगा
पता चलेगा आधी रात को
सादर