सादर नमस्कार
मंगलवार कार्तिक कृष्ण की नौमी तिथि
देखते ही देखते दीपावली भी आ गई
हमें क्या..आएगी और चली जाएगी
मंगलवार कार्तिक कृष्ण की नौमी तिथि
देखते ही देखते दीपावली भी आ गई
हमें क्या..आएगी और चली जाएगी
चलिए रचनाओं की ओर..
हैवानियत भी आज शरमा रही
तुम संग स्वयं से घृणा हो रही
मेरा दूध आज लजा रहा ,
दूसरे को क्या दोष दे ,जब
अपना ही सिक्का खोटा हो रहा ।
जब मासूमों से दरिन्दगी करते हो
उनमें अपनी माँ बहने नहीं देख पाते हो।
गरीबों की चीखें सुन नहीं पाते
बददुआओं से तिजोरियाँ भरते हो ।
और भी न जाने क्या क्या
तुम अपराध किया करते हो ।
आगे बढ़ो ....
कामरेड
तुम्हारी भीतरी चिंता
तुम्हारे चेहरे पर उभर आयी है
तुम्हारी लाल आँखों से
साफ़ झलकता है
कि,तुम
उदासीन लोगों को
जगाने में जुटे हो
आगे बढ़ो
हम तुम्हारे साथ हैं
आगे बढ़ो ....
कामरेड
तुम्हारी भीतरी चिंता
तुम्हारे चेहरे पर उभर आयी है
तुम्हारी लाल आँखों से
साफ़ झलकता है
कि,तुम
उदासीन लोगों को
जगाने में जुटे हो
आगे बढ़ो
हम तुम्हारे साथ हैं

आधा तीतर आधा बटेर हुई
बेटियों को देखकर
सोचती हूँ
आख़िर हम अपने
किस अधिकार की
लड़ाई की बात करते हैं?
क्या यही परिभाषा है
स्त्रियों की
आज़ादी और समानता की?
जब वीरानी की आकुलता
लगाती है धाद मुझे
कुछ सपने बुनके कुछ अपनेपन से
कर लेती हूँ याद तुम्हें
ये कच्चे रस्ते पगडंडियां
अब खुद ही दूरीयां नाप रही
खड़ी चढ़ाई ढलती उतराई
अब खुद ही खुद में हाँप रही

अब बारिश थम गई है
सूरज अब भी छुपा छुपा सा
बादल हैं अभी
पर भूमिका अपनी अदा कर
अब बारिश थम गई है
माँ
तेरी
ममता
स्नेहाशीष
रक्षा कवच
मेरे जीवन का
तुझ से सम्पूर्णता
....
आत्म कथ्य
दीपावली नजदीक है
काम करने वाले तो हैं
पर रेंकने-देखने वाला भी तो चाहिए
सो धनतेरस से पाँच दिन
भाई-दूज तक सिर्फ
ख्यातिनाम कवि
....
आत्म कथ्य
दीपावली नजदीक है
काम करने वाले तो हैं
पर रेंकने-देखने वाला भी तो चाहिए
सो धनतेरस से पाँच दिन
भाई-दूज तक सिर्फ
ख्यातिनाम कवि
की एक ही
रचना
देंगे
सादर
सादर



