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Thursday, October 10, 2019

140...प्रश्न अच्छे हों लिखते चले जायें

सादर अभिवादन
आज तो प्रश्न ही प्रश्न
आप पूछेंगे
क्यों....
ये भी एक प्रश्न ही है
बच्चा चैन की नींद सो रहा था
उठा दिया तो उसने भी पूछ लिया
सोने देते...क्यों उठा दिया
छुट्टियां है ..और होमवर्क भी करवा दिया है
फिर क्यूँ..
ये तो चलता ही रहेगा
चलिए लिंक की ओर..


सृष्टि ....

सृष्टि के सृजन के लिए,
कुछ पूर्ण,कुछ अपूर्ण
बीजों के अनदेखे भविष्य
के स्वप्न पोषित करती 
जीवन के अनोखे 
रंगों से परिचित करवाती
प्रसूताएँ.....,
प्रसूति-कक्ष
उलझी पहेलियों
अनुत्तरित प्रश्नों के
चक्रव्यूह में घूमती
जीवन और मृत्यु के
विविध स्वरूप से
सृष्टि के विराट रुप का
 साक्षात्कार है।



अशांत मन ,असहनीय वेदना लिये
यायावर सा भटकता रहा ,
संदेशों में कहे गूढ़ अर्थ को
समझने की कोशिशें करता रहा ।
प्रतिवर्ष  दम्भी रावण का दहन,
रावण का समाज में प्रतिनिधित्व
राम कौन ,जो मुझको मारे !ये प्रश्न पूछ
दस शीश रख अट्ठहास करना ,
समाज रावण और भेड़ियों से भरा
ये संदेश विचलित करते रहे ।


प्रश्न तो बस प्रश्न होते हैं,
तीखे से ,मीठे से,कुछ उलझे से
कुछ जज्बाती से,
तो कुछ हमेशा की तरह अनुत्तरित से।
यहां कुछ प्रश्न..?
मैंने भी पूछा ,
मां से अपनी...?

कहानी- असली करवा चौथ
रोज की तरह दोपहर के लंच टाइम में सभी सहकर्मी लंच करते-करते बातें भी कर रहे थे। रितेश बोला, 'आज तो घर जल्दी जाना हैं।' 
अनिल ने पूछा, 'क्यों, आज कुछ खास हैं क्या?'  
'लो, इन महाशय को आज का इतना खास दिन भी नहीं मालूम! अनिल, वैसे तो तुझे हर बात की पूरी जानकारी रहती हैं...फ़िर तुझे आज के खास दिन का कैसे पता नहीं?' 

जुर्माना है क्यों इतना, थोड़ी सी तो ही पी है,
नाका तो नहीं तोड़ा, लाइट जम्प तो नहीं की है। 

क्यों उनसे नहीं मतलब, जिनके हैं शीशे काले,
क्या जाने उस गाड़ी में, बैठा इक बलात्कारी है। 


बहुत दिनों बाद लिख रहा हूँ--
गलतियाँ माफ कर देंगे.....🙏

दामन पर लगे दाग साफ करदेंगे।
तेरी गलतियों को माफ करदेंगे।।

बात कोई
जज्बात
जैसी
नजर आ जाये

और
उसपर
अगर

समझ
में भी
आ जाये

गलती
हो गयी होगी

मान कर
भूल जायें

प्रश्न चिन्ह
ना लगायें।
....
आज के लिए बस
कल की कल देखेंगे
सादर