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Tuesday, October 8, 2019

138...कुछ सजीव लिखें कुछ अजीब लिखें

विजया दशमी की शुभ कामनाएँ
कुछ ही मिनट पश्चात 
रावण का पुतला भस्म हो जाएगा
पर इन्सानी रावण जीवित रहेगा
अपनी उम्र पूरी होते तक

आज की रचनाओँ का ओर चलें...

मन का रावण
आज भी खड़ा है
सर तान कर
अंगद के पाँव जैसा,
सदियां बीत गई
रावण जलाते
पुतला भस्म होता रहा हर बार
रावण वहीं खड़ा रहा


यूं सत्य की असत्य पर विजय सदा बनी रहे।
दशहरा का दिन सभी से आज बस यही कहे।

बुराइयों का अंत हो, स्वच्छ सारा तंत्र हो
एक व्यक्ति भी यहां दमन कतई नहीं सहे।


मारो एक, तो दस पैदा होते हैं रावण! 
अगणित रावण, दहन किए आजीवन, 
मनाई विजयादशमी, जब हुआ लंका दहन, 
उल्लास हुआ, हर्षोल्लास हुआ, 
मरा नहीं, फिर भी रावण! 



शहर के पुराने मैदान में,
दस मीटर ऊँचा खड़ा दशानन।
दस हजार जनों की भीड़ लगी है,
रावण का पुतला आज होगा दहन।

नव कोंपल उस पल पेड़ों पर आते हैं
पात पुरातन जड़ से जब झड़ जाते हैं    
जैविक घटकों में हैं ऐसे जीवाणु
मिट कर खुद जो दो बन कर मुस्काते हैं
दंश नहीं मानो, खोना अवसर समझो
यही शाश्वत सत्य चिरंतन माना है

कुछ
झूठ लिखें
कुछ टूट लिखें

कुछ
रस्ते कुछ
कुछ सच के
कुछ अन्जान लिखें

कुछ
बनते बनते से
कुछ शैतान लिखें

थोड़े से

कुछ
मिट्ठी से उगते
इन्सान लिखें

अब बस
रावण मारने जाना है
आप दुआ करें कि वो
सच में मर जाए..
सादर