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Wednesday, September 18, 2019

118...बस समय चलता है अब इशारों में

सादर अभिवादन
सिलसिला अनवरत हुआ नही है
विविधता नही आ पाई है इस ब्लॉग में
लगातार हम ही हम ही आ रहे हैं
आज की प्रकाशित रचनाओं से कुछ पसंदीदा रचनाएँ...

जश्न ए दोस्ती की कविताएँ....

रास्ते पे चलती वह लड़की
चुपचाप हर नज़र को सहती
सर झुकाए, चुनर संभाले
ख़ुद अपने आप में सिमटती 
डरी डरी वह मासूम
फिर भी लोगों को खटकती


खुश ना रह पाओ तो यूँ करना ....

खुश ना रह पाओ तो यूँ करना
खुश रंगों से चेहरा लेपा करना


दुर्दशा ?...

जीवन की अवधि 
और दुर्दशा 
चीटी की भांति 
होती जा रही है , 
कब मसल जाये 
कब कुचल जाये
बीच कतार से


मत करना आह्वान कृष्ण का ...

जीवन संग्राम में
किसी भी महासमर के लिये
अब किसी भी कृष्ण का
आह्वान मत करना तुम सखी !
किसी भी कृष्ण की प्रतीक्षा
मत करना !


उलूक टाईम्स की ताजा कतरन

किसलिये
डरता है
उसके
आईना
दिखाने से 

चेहरा
छुपा के
रखता है
वो
अपना
जमाने से 
....
आज का कोटा पूरा
कल मीना जी आएँगी
सादर
यशोदा