Showing posts with label 108.. Show all posts
Showing posts with label 108.. Show all posts

Sunday, September 8, 2019

108...रेत में लिखने के फायदे समझाता है

परेशान हो गए होंगे आप
लगातार तीन दिनों से
हम ही हम है
कल भी शायद हम ही रहेंगे
सादर अभिवादन...
चलिए चलते हैं रचनाओँ की ओर....

इसरो 
का सफ़र अंतहीन
मात्र विरमित हुआ ,
विसर्जित नहीं ......
पुनः गमित होगा अनंत पथ ,
लिखने को अनंत गाथा
अंतरिक्ष की, रहस्य की,


जीने की बात न कर
लोग यहाँ दग़ा देते हैं।
जब सपने टूटते हैं
तब वो हँसा करते हैं।
कोई शिकवा नहीं,मालिक !


वो दिन भी बड़े सुहाने थे,
हम दुनिया से बेगाने थे।
बस प्यार के हम परवाने थे,
कुछ खोए-खोए से रहते थे।


विदा लेते वक्त 
उसके आँखों मे आँसू थे 

पत्थर का ह्दय उसका 
शायद पिघल कर मोम हो गया था 


जब कहीं
कुछ नहीं बचता है

शून्य में ताकता
समझने की
कोशिश करता

एक समझदार

समझ में
नहीं आया

नहीं
कह पाता है।
....
चाँद ने गड़बड़ कर दी
परमीशन दे देता तो
उसका क्या बिगड़ता...आखिर
वो चाँद ही कहलाता
भारत तो नहीं हो जाता
बात समझने ही की है
सादर
यशोदा