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Friday, October 1, 2021

777 ...सुनता कोई भी नहीं था पर सब बोले जा रहे थे

सादर अभिवादन
आज विश्व बुजुर्ग दिवस है


प्रत्येक साल 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस के रूप में मनाया जाता है. 
विश्व में वृद्धों एवं प्रौढ़ों के साथ होने वाले अन्याय, उपेक्षा और दुर्व्यवहार पर 
लगाम लगाने के उद्देश्य से हर साल इंटरनेशनल डे ऑफ ओल्डर पर्सन 
(International Day Of Older Persons) मनाया जाता है.

प्रस्तुत है रचनाएँ....

विश्व बुजुर्ग दिवस .....डॉ. टी.एस.दराल


पार्क में एक पेड़ तले दस बुज़ुर्ग बैठे बतिया रहे थे,
सुनता कोई भी नहीं था पर सब बोले जा रहे थे !
भई उम्र भर तो सुनते रहे बीवी और बॉस की बातें,
दिन मे चुप्पी और नींद मे बड़बड़ाकर कटती रही रातें !
अब सेवानिवृत होने पर मिला था बॉस से छुटकारा,
बरसों से दिल मे दबा गुब्बार निकल रहा था सारा !



रात भर जागकर हरसिंगार वृक्ष
उसकी सख्त डालियों से लगे
नरम नाजुक पुष्पों की करता रखवाली

भूले गले लगाना ! ..डॉ. ज्योत्सना शर्मा


चंदा-सूरज
मुट्ठी में बाँध लिए
सागर सारे
पर्वत नाप लिए
अँधियारों पे
विजय पा गए  हो
उजालों में क्यूँ
यूँ भरमा गए हो ?


अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर ...गिरीश पंकज


जिसने इस दुनिया में आकर,
गर वृद्धों का सम्मान किया ।
उसने अपने लघु जीवन का,
प्रतिफल जैसे उत्थान किया।
उसका वंदन जो बूढ़ों का,
बढ़कर अभिनंदन करता है ।
जो वृद्धजनों की सेवा में,
तन-मन- धन अर्पण करता है।।


आज नया इक गीत लिखूँ ......कुसुम कोठारी


वीणा का जो तार न झनके
सरगम की धुन पंचम गाएँ
मन का कोई साज न खनके
नया मधुर सा राग सजाएँ
कुछ खग के कलरव मीठे से
पीहू का संगीत लिखूँ मैं।।
...
आज बस
कल आऊँगी गांधी जी के साथ
सादर